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जब चारा घोटाला मामले में जगन्नाथ मिश्रा को मिली थी बेल, लालू को मिली जेल

 जिस चारा घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव जेल में सजा काट रहे हैं, उसी में पूर्व मुख्यमंत्री गन्नाथ मिश्रा का नाम भी शामिल था, क्योंकि ये मामला उन्हीं के मुख्यमंत्री रहते हुए हुआ था। इस मामले में अदालत ने उन्हें दोषी भी करार दिया था, लेकिन बाद में एक फैसले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी भी कर दिया था।

जगन्नाथ मिश्रा को बेल औऱ लालू को जेल

चारा घोटाले के देवघर कोषागार से 89 लाख से अधिक की अवैध निकासी के संबंध में जब से ये फैसला आया कि जगन्नाथ मिश्रा को बेल औऱ लालू को जेल… तब से इस इस बात पर बिहार में राजनीतिक बहस छिड़ी थी कि आखिर बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों में से एक दोषी और दूसरे को कैसे बरी कर दिया गया? जबकि इस घोटाले के एक अन्य मामले में तीन साल पूर्व दोनों को एक साथ दोषी करार दिया गया था।

चारा घोटाला में जगन्नाथ मिश्रा को भी मिली थी सजा 

चारा घोटाला की शुरुआत जगन्नाथ मिश्रा के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए ही हो चुकी थी। लेकिन मामले का खुलासा तब हुआ, जब 1990 के दशक में लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा पर आरोप था कि इन्होंने दुमका और डोरंडा कोषागार से धोखाधड़ी कर रुपये निकाल लिए। जिसके आरोप में सीबीआई की अदालत ने डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा को चार साल की सजा सुनायी थी और साथ ही दो लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया था।

उसके बाद देवघर कोषागार से संबंधित फैसले की कॉपी आने के बाद कोर्ट में सीबीआई पूर्व मुख्यमंत्री मिश्रा के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाई और जज ने फैसले में लिखा कि मिश्रा को संदेह का लाभ मिल रहा है, क्योंकि उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए। इस फैसले पर कोर्ट सीबीआई की दलील से संतुष्ट हो गई थी।

नहीं मिला था घोटाला मामले में साक्ष्य 

दरअसल, कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि जगन्नाथ मिश्रा का सीधे तौर पर इस घोटाले में कोई संबंध साबित नहीं हो पाया या सीबीआई ऐसा कोई साक्ष्य नहीं जुटा पाई जिससे साबित हो सके कि घोटाले में मिश्रा की किसी तरह की भूमिका थी।

वहीं, लालू यादव के खिलाफ सीबीआई ने सुनवाई के दौरान ये आरोप लगाया था कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद अवैध निकासी और तेज हुई। इसके अलावा ये भी सच है कि घोटाले के मास्टरमाइंड को उन्होंने सेवा विस्तार दिया।

लालू यादव को दिसंबर 1993 में घोटाले का ज्ञान हो गया था, जब उन्होंने सीएजी रिपोर्ट देखी थी। यहां तक कि 1996 जनवरी महीने में जब मामला उजागर हुआ, तब लालू यादव ने ही फाइल पर ये टिप्पणी की कि आगे की कार्रवाई के पहले सभी तथ्यों को एकत्रित किया जाये।

लालू यादव पाए गए थे दोषी

कोर्ट ने लालू को दोषी मानते हुए फैसले में लिखा कि चारा घोटाले के दो मुख्य मास्टरमाइंड लालू यादव के आंखो के सितारे थे। लालू के खिलाफ जब भी जांच की मांग हुई, तब इस मामले के अन्य दोषी जैसे जगदीश शर्मा के साथ मिलकर उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की।

जगन्नाथ मिश्रा को मिल गई थी नियमित जमानत

झारखंड हाई कोर्ट ने चारा घोटाले के तीन अलग-अलग मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर नियमित जमानत दी थी। जगन्नाथ मिश्र के वकील इंद्रजीत सिन्हा ने बताया कि न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने कैंसर और दूसरी बीमारियों से पीड़ित मिश्र को चारा घोटाले के सभी मामलों में नियमित जमानत दे दी थी।

कैंसर की थी बीमारी, मेदांता में चल रहा था इलाज

सिन्हा ने न्यायालय को बताया कि जगन्नाथ मिश्र 16 फरवरी, 2018 से चारा घोटाले के तीन मामलों में अस्थाई जमानत पर थे और दिल्ली के निकट गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में उनका कैंसर के लिए नियमित इलाज चल रहा था।

उसके बाद लंबे समय से बीमार चल रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा का 83 वर्ष की आयु में  सोमवार को निधन हो गया। जगन्नाथ मिश्रा अपने पीछे तीन बेटे और तीन बेटियों के साथ भरा-पूरा परवार छोड़ गये हैं। मालूम हो कि उनकी पत्नी वीणा मिश्रा का पिछले साल जनवरी माह में गुड़गांव के मेदांता हॉस्पीटल में 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।

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