Wednesday , August 3 2022

वाराणसी और इलाहाबाद के बाढ़ पीढ़ितों के लिए – ओला बोट्स

वाराणसी/इलाहाबाद/लखनऊ: वाराणसी और इलाहाबाद में बाढ़ से प्रभावित हजारों नागरिकों की मदद करने के प्रयास में मोबाइल एप ओला ने शुक्रवार को घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के दो शहरों के प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए ओला बोट्स उपलब्ध कराई गई है. पेशेवर नाविकों से युक्त ये ओला बोट्स बाढ़ में फंसे नागरिकों को बचा कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद करेंगी और उन तक राहत सामग्री जैसे खाद्य पदार्थ, पेयजल और दवाएं पहुंचाएंगी.

ओला ने पेश की स्पेशल कैटेगरी ‘डोनेट’

ओला ने वाराणसी और इलाहाबाद में अपने एप पर एक स्पेशल कैटेगरी ‘डोनेट’ पेश की है. वे नागरिक जो बाढ़ प्रभावितों के लिए खाद्य सामग्री, कपड़े, कम्बल, दवाएं आदि दान में देना चाहते हैं, ओला एप खोल कर इस आइकन पर क्लिक कर सकते हैं.

ओला की एक राहत वैन उनके घर पहुंच कर उनसे यह सामग्री इकट्ठा करेगी और इसे ओला बोट्स के माध्यम से बाढ़ में फंसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा. यह कैटेगरी 27 अगस्त से तीन दिनों के लिए हर दिन सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक लाइव रहेगी.

आसानी से दान में दे सकें जरूरी चीजें

ओला के व्यापार प्रमुख (पूर्व) पीयूष सुराना ने कहा, “वाराणसी और इलाहाबाद में हजारों नागरिक बाढ़ में फंसे हुए हैं और भारी बारिश और जल-भराव से परेशान हैं. हम चाहते हैं कि हमारे प्रौद्योगिकी मंच के माध्यम से वे लोग आसानी से जरूरी चीजें दान में दे सकें, जो इन बाढ़ पीढ़ितों की मदद करना चाहते हैं. दान में आई इस सामग्री को हम ओला बोट्स के द्वारा बाढ़ पीड़ितों तक पहुचाएंगे.”

सुराना ने कहा, “हम शहर के उन लोगों को परिवहन के साधन मुहैया कराकर भी उनकी मदद करेंगे, जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है. हम हमारे उपयोगकर्ताओं से आग्रह करते हैं कि आगे आएं और संकट में फंसे अपने साथी नागरिकों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं.”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी ओला ने चेन्नई और गुवाहाटी में इसी तरह के बाढ़ राहत अभियानों का आयोजन किया है.

नदियां उतार पर, मगर दुश्वारियां कम नहीं

उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तबाही मचाने वाली गंगा और यमुना समेत विभिन्न नदियां अब उतार पर हैं. मगर अब इस कारण कटान की आशंका बढ़ने से हालात सुधरने के आसार नहीं हैं.

केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा नदी फाफामउ (इलाहाबाद) छतनाग, (इलाहाबाद), मिर्जापुर और वाराणसी में उतार पर है, जबकि गाजीपुर और बलिया में इसका जलस्तर स्थिर है लेकिन वह इन सभी स्थानों पर अब भी खतरे के निशान से उपर बह रही है. जलस्तर घटने से अब तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर कटान का खतरा बढ़ गया है.

इसके अलावा फतेहगढ़ में गंगा का जलस्तर अब भी खतरे के निशान के नजदीक बना हुआ है जबकि नरौरा (बुलन्दशहर), अंकिनघाट (कानपुर देहात) और कानपुर में उसका जलस्तर लाल चिहन से नीचे पहुंच गया है.

यमुना नदी के जलस्तर में भी आयी है कमी

यमुना नदी के जलस्तर में भी कमी आयी है और अब यह सिर्फ नैनी (इलाहाबाद) में खतरे के निशान से उपर बह रही है, जबकि चिल्लाघाट (बांदा) और प्रयागघाट में यह नदी लाल चिहन के नजदीक बह रही है. शारदा नदी का जलस्तर पलियाकलां(खीरी) में खतरे के निशान के उपर बना हुआ है. घाघरा नदी एल्गिनब्रिज तथा अयोध्या में लाल चिहन के नजदीक बह रही है.

गंगा नदी की बाढ़ से इलाहाबाद, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर और बलिया के 950 से ज्यादा गांवों की साढ़े आठ लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित हुई है. अब तक 28 जिले बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं. बाढ़ में बचाव एवं राहत कार्य के लिये राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) की मदद ली जा रही है.

इस बीच, आंचलिक मौसम विज्ञान केन्द्र की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान कुछ स्थानों पर वष्रा हुई. राजधानी लखनउ तथा आसपास के जिलों में आज दोपहर बाद हुई वर्षा से लोगों को पिछले कुछ दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से राहत मिली. अगले 24 घंटे के दौरान भी राज्य में कुछ स्थानों पर ही बारिश का अनुमान है.

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